सतना के मझगवां क्षेत्र की आदिवासी बस्तियों में पेयजल संकट गंभीर हो गया है। दूषित पानी और सूखे हैंडपंपों से परेशान ग्रामीणों ने प्रशासनिक टीम के सामने नाराजगी जताई, जबकि अधिकारियों ने स्थायी समाधान और जल संरक्षण कार्यों का भरोसा दिया।
सतना शहर के कई इलाकों में इन दिनों गंदे पानी की आपूर्ति से लोग परेशान हैं। नगर निगम के अनुसार, इस समस्या की मुख्य वजह पेयजल व्यवस्था नहीं बल्कि शहर में चल रहे निर्माण और विकास कार्य हैं, जिनके चलते कई स्थानों पर पेयजल सप्लाई लाइन क्षतिग्रस्त हो गई।
मझगवां पंचायत में नल-जल योजना की खामियां उजागर हुईं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि घरों तक पानी नहीं पहुंच रहा और नलों से हवा निकल रही है। ऑपरेटर की लापरवाही और खराब वाल्व की वजह बताकर समस्या टाली जा रही है। नाराज लोगों ने अधिकारियों को ज्ञापन देकर समाधान की मांग की।
मैहर त्रिकूट वासिनी मां शारदा मंदिर में प्रबंधक समिति ने प्रथम और द्वितीय तल पर कैंटीन संचालन के लिए निविदा जारी की है। इसमें पानी के पाउच, बोतल, बिस्किट और चिप्स बेचने की अनुमति प्रस्तावित है। पहले आग की घटना के बाद कैंटीन पर रोक लगी थी, लेकिन अब श्रद्धालुओं की सुरक्षा को नजरअंदाज कर कमाई पर जोर दिया जा रहा है। सवाल उठ रहे हैं कि समिति श्रद्धालुओं को मुफ्त शुद्ध पेयजल क्यों नहीं उपलब्ध करा सकती।
पन्ना जिले के गिधौड़ा गांव में दूषित पानी से उल्टी-दस्त का प्रकोप फैलने से 40 से अधिक ग्रामीण बीमार हो गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने शिविर लगाकर इलाज शुरू किया है। वहीं, पवई जनपद के हड़ा गांव में ग्रामीणों को पेयजल संकट के चलते नाले का गंदा पानी पीना पड़ रहा है। प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग।
रीवा, सतना और मऊगंज में आयोजित जनसुनवाई में नागरिकों ने सड़क, नाली, पेयजल, सीमांकन व राहत राशि जैसी समस्याएं उठाईं, अधिकारियों ने दिए कार्यवाही के निर्देश।


















